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पाकिस्तानी महिला को शिक्षक बनाने में कई की भूमिका संदिग्ध,शिक्षिका का वोटर आईडी कार्ड हो चुका है निरस्त, बर्खास्तगी की तैयारी तेज

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Written by Ravi Singh

बरेली/रामपुर, पाकिस्तान की नागरिकता छुपाकर नौकरी कर रही शिक्षिका की सेवा समाप्ति की उल्टी गिनती तेज हो गई है। मां-बेटी को सरकारी शिक्षक बनाने में कई लोगों की भूमिका संदिग्ध है। डीएम-एसपी ने जांच में तत्कालीन बीएसए को दोषी मानते हुए गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भी भेजी थी। तब इस हाईप्रोफाइल मामले को दबा दिया गया। वर्षों बाद अब फिर से गृह मंत्रालय सक्रिय हुआ तो खुफिया तंत्र भी सूचनाएं और दस्तावेज एकत्र करने में जुट गया।Screenshot 20220822 122612 1

रामपुर निवासी शिक्षिका फरजाना उर्फ माहिरा अख्तर की सेवाएं विभाग ने समाप्त कर दी थी। माहिरा के ऊपर पाकिस्तानी नागरिक होने की सूचना छुपाकर नौकरी पाने का आरोप है। वीजा खत्म होने पर एलआईयू ने रामपुर की शहर कोतवाली में 1983 में विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था। उनकी बेटी शुमाएला खान बरेली के फतेहगंज स्थित प्राइमरी स्कूल माधौपुर में 2015 से तैनात थी।

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प्राथमिक जांच के आधार पर बीएसए ने शुमाएला को निलंबित कर दिया था। बीएसए ने रामपुर सदर के एसडीएम को शुमाएला का निवास और जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के लिए 19 मई को पत्र भेजा था। लगभग साढ़े तीन महीने के बाद भी इसका जवाब नहीं आया है। बीएसए विनय कुमार ने बताया कि नियुक्ति में शैक्षिक दस्तावेज के साथ ही निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण होते हैं। इनके आधार पर ही नौकरी मिलती है। जैसे ही निवास और जाति प्रमाण पत्र निरस्त होंगे, वैसे ही शुमाएला की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। हालांकि बताया यह भी जा रहा है कि माहिरा ने वर्षों पहले ही नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया था। उन्होंने अपनी बेटियों की भी भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था। वर्षों चक्कर लगाने के बाद भी उनको नागरिकता नहीं मिली।

सपा सरकार में दबा दी गई थी फाइल सपा सरकार में ऊंची पहुंच के चलते उस वक्त के एक कद्दावर नेता और अफसरों ने इस चर्चित प्रकरण को दबा दिया था। अब दोबारा मामला सामने आया तो मां को बर्खास्त कर दिया गया जबकि बेटी को निलंबित कर दिया गया है।

पाकिस्तानी होने के बाद भी हो गया सत्यापन बेसिक शिक्षा विभाग में नियुक्ति के समय सभी प्रमाण पत्रों का सत्यापन होता है। शुमाएला के पाकिस्तानी होने के बाद भी उनके निवास और जाति प्रमाण पत्र की सत्यापन रिपोर्ट सही होकर आ गई। शासन ने इस विषय में भी अधिकारियों से सवाल पूछे हैं।

प्रमुख सचिव गृह ने तलब किए थे डीएम

इस प्रकरण में 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश त्रिपाठी को प्रमुख सचिव गृह ने तलब किया था। जिस पर तत्कालीन एसपी, एलआईयू, आईबी के अधिकारियों के साथ बैठक कर तत्कालीन डीएम ने रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें प्रथम दृष्टया बीएसए को दोषी माना गया था। बाद में दो जून 2015 को प्रमुख सचिव गृह के समक्ष पेश हो डीएम-एसपी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट उन्हें सौंप दी थी।

चयन बोर्ड में शामिल सभी अधिकारियों को माना दोषी

तत्कालीन बीएएसए के अलावा चयन बोर्ड में शामिल सभी अधिकारियों को दोषी माना गया है। खुफिया तंत्र के अनुसार चयन बोर्ड के समक्ष मूल प्रमाण पत्र देने होते हैं, जिनके सत्यापन के बाद ही आगे की कार्रवाई होती है। आवेदन से लेकर सत्यापन तक फर्जीवाड़ा किया गया। तत्कालीन बीएसए ने नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया। ऐसे में ढंग से जांच हो जाए तो कई की गर्दन फंसनी तय है।

 

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